CHAPTER- 4 पौधो को जानिए
Notes
1. शाक- इनका आकार छोटा होता है और तने मुलायम होते हैं।
- उदाहरण- गेहूं, घास, पुदिना आदि।
2. झाड़ी- ये मध्यम आकार के होते हैं। झाड़ी के तने में शाखाएं जमीन से थोड़े ऊपर से ही निकलती है।
- उदाहरण- धनिया, गुलाब आदि।
- उदाहरण- आम, नीम आदि।
- उदाहरण- तरबूज, कद्दू आदि।
- उदाहरण- अंगूर, मनी प्लांट आदि।
6. पादप की संरचना-
तना- तने में पतियां, शाखाएं, कली, फल व फूल होते हैं। तना जल का संवहन करता है। जल मे विलीन खनीज, जल के साथ तने में ऊपर पहुंच जाते हैं।
पती- पती का वह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है, पर्णवृंत कहलाता है।
वाष्पोत्सर्जन- जब जल की बूंदें वाष्प के रूप मे परिवर्तित हो जाती है तो इसे वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
प्रकाश संश्लेषण- पतियां प्रकाश और हरे रंग के एक पदार्थ की उपस्थिति में अपना भोजन बनाती है। इस प्रक्रिया में जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करती है। इस प्रक्रम को प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं। इस प्रक्रम में आक्सीजन निष्कासित होती है।
7. जड़- यह पौधे के नीचे के मिट्टी में होती है। ये दो प्रकार की होती है- 1. मूसला जड़ तथा 2. झकडा जड़।
मूसला जड़- जिन पौधो की जड़ों में एक मुख्य जड़ होती है तथा उसके चारों ओर से जड़े निकलती है कहलातीं हैं तथा छोटी जड़ों को पार्श्व जड़ कहते हैं।
झकडा/रेशेदार जड़- जिन पौधो की कोई भी मुख्य जड़ नहीं होती। सभी जड़े एक समान दिखाई पड़ती है। इन्हें जकड़ा जड़ अथवा रेशेदार जड़ कहते हैं।
8. पुष्प- पुष्प अथवा फूल जनन संरचना हैं जो पौधो में पाए जाते हैं। जिसे एग्नियों शुक्राणु भी कहा जाता हैं। एक फूल की जैविक क्रिया यह है कि वह पुरुष शुक्राणु और मादा बीजाणु के संघ के लिए मध्यस्तता करें।
9. बाह्य दल- पुष्प के सबसे बाहरी भाग को बाह्य दल कहते हैं। यह पुष्प के आंतरिक भागों की रक्षा करता है जब वह कालिका अवस्था में होता है। बाह्यदल के लक्षण यह आमतौर पर हरे रंग का होता हैं।
10.स्त्रीकेसर- पुष्प के केंद्र में स्थित भाग को स्त्रीकेसर कहते हैं।
11. अंडाशय- यह स्त्रीकेसर का सबसे निचला एवं फूला हुआ भाग हैं। इसकी आंतरिक संरचना के अध्ययन के लिए इसे काटते हैं।
12. बीजांड- अंडाशय में छोटी-छोटी गोल संरचनाएं होती है जिन्हें बीजांड कहते हैं।
13.पुंकेसर- पुष्प का पराग उत्पादक भाग, जिसमें आमतौर पर परागकोश को सहारा देने वाला एक पतला तंतु होता है।
14. परागकोश- पुंकेसर का वह भाग जहां पराग का उत्पादन होता हैं।
तना- तने में पतियां, शाखाएं, कली, फल व फूल होते हैं। तना जल का संवहन करता है। जल मे विलीन खनीज, जल के साथ तने में ऊपर पहुंच जाते हैं।
पती- पती का वह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है, पर्णवृंत कहलाता है।
- पती के चपटे हरे भाग को फलक कहते हैं।
- पती के अंदर बनी रेखित संरचना शिरा होती है। पती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है, इसे मध्य शिरा कहते हैं।
- पतियो पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को शिरा विन्यास कहते हैं। यदि यह डिजाइन मध्य शिरा के दोनों ओर जाल जैसा है तो यह शिरा-विन्यास जालिका रूपी कहलाता हैं।
- जब यह शिरा विन्यास एक दूसरे के समांतर होते है तो इस शिरा विन्यास को समांतर शिरा-विन्यास कहते हैं।
वाष्पोत्सर्जन- जब जल की बूंदें वाष्प के रूप मे परिवर्तित हो जाती है तो इसे वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
प्रकाश संश्लेषण- पतियां प्रकाश और हरे रंग के एक पदार्थ की उपस्थिति में अपना भोजन बनाती है। इस प्रक्रिया में जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करती है। इस प्रक्रम को प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं। इस प्रक्रम में आक्सीजन निष्कासित होती है।
7. जड़- यह पौधे के नीचे के मिट्टी में होती है। ये दो प्रकार की होती है- 1. मूसला जड़ तथा 2. झकडा जड़।
मूसला जड़- जिन पौधो की जड़ों में एक मुख्य जड़ होती है तथा उसके चारों ओर से जड़े निकलती है कहलातीं हैं तथा छोटी जड़ों को पार्श्व जड़ कहते हैं।
झकडा/रेशेदार जड़- जिन पौधो की कोई भी मुख्य जड़ नहीं होती। सभी जड़े एक समान दिखाई पड़ती है। इन्हें जकड़ा जड़ अथवा रेशेदार जड़ कहते हैं।
- जड़े मिट्टी से जल का अवशोषण करती है तथा तना, जल एवं खनिज को पती एवं पौधे के अन्य भागों तक पहुंचाता है। पत्तियां भोजन संश्लेषित करती हैं। यह भोजन तने से होकर पौधे के विभिन्न भागों में संग्रहित हो जाता है। कुछ जड़ों जैसे- गाजर, मूली आदि को हम खाते हैं।
8. पुष्प- पुष्प अथवा फूल जनन संरचना हैं जो पौधो में पाए जाते हैं। जिसे एग्नियों शुक्राणु भी कहा जाता हैं। एक फूल की जैविक क्रिया यह है कि वह पुरुष शुक्राणु और मादा बीजाणु के संघ के लिए मध्यस्तता करें।
9. बाह्य दल- पुष्प के सबसे बाहरी भाग को बाह्य दल कहते हैं। यह पुष्प के आंतरिक भागों की रक्षा करता है जब वह कालिका अवस्था में होता है। बाह्यदल के लक्षण यह आमतौर पर हरे रंग का होता हैं।
10.स्त्रीकेसर- पुष्प के केंद्र में स्थित भाग को स्त्रीकेसर कहते हैं।
11. अंडाशय- यह स्त्रीकेसर का सबसे निचला एवं फूला हुआ भाग हैं। इसकी आंतरिक संरचना के अध्ययन के लिए इसे काटते हैं।
12. बीजांड- अंडाशय में छोटी-छोटी गोल संरचनाएं होती है जिन्हें बीजांड कहते हैं।
13.पुंकेसर- पुष्प का पराग उत्पादक भाग, जिसमें आमतौर पर परागकोश को सहारा देने वाला एक पतला तंतु होता है।
14. परागकोश- पुंकेसर का वह भाग जहां पराग का उत्पादन होता हैं।
अभ्यास
प्रश्न- 1 निम्न कथनों को ठीक करके लिखिए:
(क) तना मिट्टी से जल एवं खनिज अवशोषित करता है।
(ख) पत्तियां पौधे को सीधा खड़ा रखतीं हैं।
(ग) जड़ें जल को पत्तियों तक पहुंचाती हैं।
(घ) पुष्प में पुंकेसरों एवं पंखुड़ियों की संख्या सदा समान होती है।
(ड़) यदि किसी पुष्प के बाह्रादल परस्पर जुड़े हो तो उसकी पंखुड़ियां भी आपस में जुड़ी होंगी।
(च) यदि किसी पुष्प की पंखुड़ियां परस्पर जुड़ी हो तो स्त्रीकेसर पंखुड़ियों से जुड़ा होगा।
उत्तर- (क) जड़ें मिट्टी से जल एवं खनिज अवशोषित करता है।
(ख) तना पौधे को सीधा खड़ा रखतीं हैं।
(ग) तना जल को पत्तियों तक पहुंचाती है।
(घ) पुष्प में पुंकेसरों एवं पंखुड़ियों की संख्या सदा समान नहीं होती है।
(ड़) यदि किसी पुष्प के बाह्रादल परस्पर अलग हो तो उसकी पंखुड़ियां भी आपस में जुड़ी न हो।
(च) यदि किसी पुष्प की पंखुड़ियां परस्पर जुड़ी हो तो यह जरूरी नहीं है कि स्त्रीकेसर पंखुड़ियों से जुड़ा होगा।
प्रश्न- 2 निम्न के चित्र बनाइए:
(क) पत्ती, (ख) मूसला जड़, (ग) एक पुष्प जिसका आपने सारणी 4.3 में अध्ययन किया हो।
उत्तर- (क)
(ख) (ग)
उत्तर- मनी प्लांट का तना लंबा होता है परंतु दुर्बल भी होता है। ये विसर्पी लता वर्ग में आते हैं।
प्रश्न- 4 पौधे में तने का क्या कार्य है?
उत्तर- पौधे में तने के निम्न कार्य है:-
- यह फलो, फूलों, पत्तियों को धारण करता है।
- तना पानी और खनिजों को जड़ों से ऊपरी हिस्सों में पहुंचाता है।
- यह पत्तियों में तैयार हुए भोजन को अन्य भागों में पहुंचाता है।
प्रश्न- 5 निम्न में से किन पत्तियों में जालिका रूपी शिरा-विन्यास पाया जाता है?
गेहूं, तुलसी, मक्का, घास, धनिया, गुड़हल
उत्तर- तुलसी, धनिया और गुड़हल।
प्रश्न- 6 यदि किसी पौधे की जड़ रेशेदार हो तो उसकी पत्ती का शिरा-विन्यास किस प्रकार का होगा?
उत्तर- समांतर शिरा-विन्यास
प्रश्न- 7 यदि किसी पौधे की पत्ती में जालिका रूपी शिरा-विन्यास हो तो उसकी जड़ें किस प्रकार की होंगी?
उत्तर- मूसला जड़
प्रश्न- 8 क्या आप किसी पौधे की पत्ती की छाप को देखकर यह पहचान कर सकते हैं कि उसकी जड़ मूसला जड़ होंगी अथवा झकड़ा जड़? कैसे?
उत्तर- हां, यदि पौधे की पत्ती में जालिका रूपी शिरा-विन्यास हो तो उसकी जड़ें मूसला जड़ होंगी और यदि पौधे की पत्ती में समांतर शिरा-विन्यास हो तो उसकी जड़ें झकड़ा जड़ें होंगी।
प्रश्न- 9 पुष्प के विभिन्न भागों के नाम लिखिए।
उत्तर- पुष्प के विभिन्न भाग है- बाह्यदल, पंखुड़ियां, स्त्रीकेसर, पुंकेसर आदि।
प्रश्न- 10 निम्न में से किस पौधों में फूल होते हैं?
घास, मक्का, गेहूं, मिर्च, टमाटर, तुलसी, पीपल, शीशम, बरगद, आम, जामुन, अमरूद, अनार, पपीता, केला, नींबू, गन्ना, आलू, मूंगफली।
उत्तर- मक्का, टमाटर, तुलसी, पीपल, बरगद, आम, जामुन, अमरूद, पपीता और आलू के पौधों के फूल होते हैं।
प्रश्न- 11 पौधों के उस भाग का नाम लिखिए जो अपना भोजन बनाता है। इस प्रक्रम को क्या कहते हैं?
उत्तर- पौधों की पत्तियां भोजन बनाने का कार्य करतीं हैं। पत्तियों द्वारा भोजन बनाने की प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
प्रश्न- 12 पुष्प के किस भाग में अंडाशय मिलता हैं?
उत्तर- पुष्प में स्त्रीकेसर के सबसे निचले भाग में अंडाशय स्थित होता है।
प्रश्न- 13 ऐसे दो पुष्पों के नाम लिखिए जिनमें से प्रत्येक में संयुक्त और अलग-अलग बाह्यदल हो।
उत्तर- संयुक्त पंखुड़ियों वाले पुष्प- धतुरा और टमाटर
अलग-अलग पंखुड़ियों वाले पुष्प- कमल और गुलाब
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