CHAPTER- 9 दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियां
NOTES
1. मिश्रण- वह पदार्थ जिसमें दो या अधिक पदार्थ मिले होते हैं मिश्रण कहलाते हैं। जैसे- गेहूं और चावल
- किसी ठोस मिश्रण में से हाथ द्वारा छोटे कंकड़ और भूसी अलग करने की प्रक्रिया हस्त चयन कहलाती है।
2. थ्रेशिंग- दानों को पृथक करने की प्रक्रिया थ्रेशिंग कहलाती हैं। उदाहरण गेहूं के दाने पृथक करना।
3. पारंपरिक रूप से किसी मिश्रण के भारी और हल्के अवयवों को अलग-अलग करने के लिए सूप (बांस से निर्मित एक पात्र) का उपयोग किया जाता है।
4. ओसाई- मिश्रण में से भारी और हल्के अवयवों को हवा या फूंक मारकर पृथक करने की विधि ओसाई (विनोइंग) कहलाती है।
5. जब दो या दो से अधिक ठोसों के मिश्रण के अवयवों के कणों के आकार भिन्न होते हैं, तब चालन विधि का उपयोग किया जाता है।
6. नमक-
- नमक प्राप्त करने के लिए समुद्र का जल उथले गड्ढों में रखा जाता है जहां यह धूप और हवा के संपर्क में आता है।
- कुछ दिनों में, जल पूरी तरह से वाष्पित हो जाता है और ठोस नमक शेष रह जाता है।
- फिर लवण के इस मिश्रण को शोधित कर साधारण नमक प्राप्त किया जाता है।
7. अवसादन- ठोस और द्रव के मिश्रण में भारी अवयव नीचे बैठ जाता है, इस प्रक्रिया को अवसादन (सेंडीमेंटेशन) कहते हैं।
8. निस्तारण- जब बर्तन को तिरछा कर जल को हटाया जाता है, तो यह प्रक्रिया निस्तारण (डीकेंटेशन) कहलाती हैं।
9. निस्यंदन- चाय से चाय की पत्तियां पृथक करने की प्रक्रिया को निस्यंदन (फिल्टर करना) कहते हैं।
- यदि जल एक बार छानने के बाद भी गंदा है, तो अशुद्धियां फिल्टर-पत्र का उपयोग करके अलग की जा सकती हैं, जिसमें और भी छोटे रंध्र या छिद्र होते हैं। फिल्टर-पत्र एक ऐसा निस्यंदक होता है, जिसमें अत्यंत सूक्ष्म छिद्र होते हैं।
10. मथना- दही मथकर मक्खन प्राप्त करने की प्रक्रिया को मथना कहते हैं। इस प्रक्रिया में हल्का होने के कारण मक्खन ऊपर तैरता है जबकि छाछ नीचे रह जाती हैं।
11. चुंबकीय पृथक्करण- वे पदार्थ जो चुंबक के प्रति आकर्षित होते हैं, उन्हें चुंबकीय पदार्थ कहा जाता है।
- चुंबक का उपयोग करके चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों को पृथक करने को चुंबकीय पृथक्करण कहते है।
आइए, और अधिक सीखें
प्रश्न- 1. पृथक्करण विधि के रूप में हस्त चयन का क्या प्रयोजन है?
(क) निस्यंदन (ख) छंटाई (ग) वाष्पन (घ) निस्तारण
उत्तर- (ख) छंटाई
प्रश्न- 2. निम्नलिखित में से किन पदार्थों का पृथक्करण मथना विधि से किया जाता है?
(क) तेल का पानी से (ख) रेत का पानी से (ग) मक्खन का दही से (घ) आक्सीजन का वायु से
उत्तर- (ग) मक्खन का दही से
प्रश्न- 3. निस्यंदन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक प्रायः अनिवार्य होता है?
(क) उपकरण का आकार (ख) वायु की उपस्थिति (ग) छिद्रों का आकार (घ) मिश्रण का तापमान
उत्तर- (ग) छिद्रों का आकार
प्रश्न- 4. कारण देते हुए बताएं कि निम्नलिखित कथनों में सही (✓) और गलत (×) कौन-कौन से हैं? असत्य कथनों को सही करके लिखें।
(क) नमक के विलयन को सूर्य के प्रकाश में या धूप में रखकर नमक को इससे पृथक किया जा सकता है। ( )
(ख) जब तक अवयव कम मात्रा में हो तभी हस्त चयन का उपयोग होता हैं। ( )
(ग) मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को थ्रेशिंग द्वारा पृथक कर सकते हैं। ( )
(घ) सरसों के तेल और नींबू पानी के मिश्रण को निस्तारण द्वारा पृथक कर सकते हैं। ( )
(ड) छानने की विधि का उपयोग चावल के आटे और पानी को पृथक करने में होता हैं। ( )
उत्तर- (क) नमक के विलयन को सूर्य के प्रकाश में या धूप में रखकर नमक को इससे पृथक किया जा सकता है। (✓)
क्योंकि धूप में रखने पर पानी वाष्पित हो जाता है, जिससे नमक शेष रह जाता है।
(ख) जब एक अवयव कम मात्रा में हो तभी हस्त चयन का उपयोग होता है। (×)
क्योंकि हस्त चयन विधि का प्रयोग उन मिश्रणों में होता है जहां कणों का आकार, रंग या आकृति भिन्न-भिन्न होती है और इन्हें आसानी से हाथ से छांटा जा सकता है।
(ग) मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को थ्रेशिंग द्वारा पृथक कर सकते हैं। (×)
क्योंकि मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को थ्रेशिंग द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता है, इसके लिए ओसाई विधि का उपयोग करते हैं।
(घ) सरसों के तेल और नींबू पानी के मिश्रण को निस्तारण द्वारा पृथक कर सकते हैं। (×)
क्योंकि सरसों के तेल और नींबू पानी के मिश्रण को निस्तारण द्वारा पृथक नहीं कर सकते हैं बल्कि फनल या किसी और विधि द्वारा पृथक किया जा सकता है, क्योंकि ये दोनों अलग-अलग तरह होते हैं।
(ड) छानने की विधि का उपयोग चावल के आटे और पानी को पृथक करने में होता है। (✓)
क्योंकि छानने की विधि का उपयोग ठोस पदार्थ को तरल से पृथक करने में किया जाता है।
प्रश्न- 5. स्तंभ 1 में दिए गए प्रत्येक मिश्रण को स्तंभ 2 में उपयुक्त पृथक्करण विधि से मिलान करें।
उत्तर-
प्रश्न- 6. किस परिस्थिति में आप ठोस और द्रव के मिश्रण को पृथक करने में निस्यंदन के स्थान पर निस्तारण विधि का उपयोग करेंगे?
उत्तर- निस्तारण विधि का प्रयोग तब किया जाएगा जब ठोस पदार्थ द्रव में घुला हुआ न हो और वह द्रव के तल में बैठ जाए। उदाहरण के लिए, अगर मिट्टी और पानी का मिश्रण है तो मिट्टी पानी के तल में बैठ जाती है जिसे निस्तारण विधि से अलग किया जा सकता है। यदि ठोस पदार्थ हल्का हो और द्रव में तैरता है, तो निस्यंदन विधि का प्रयोग किया जाएगा।
प्रश्न- 7. नासिका में बालो की उपस्थिति को आप किस पृथक्करण प्रक्रिया से जोड़कर देखते हैं?
उत्तर- नासिका में बालो की उपस्थिति को निस्यंदन प्रक्रिया से जोड़कर देख सकते हैं। नासिका में उपस्थित बाल वायु में मौजूद धूलकण और अन्य अशुद्धियों को नाक के अंदर प्रवेश करने से रोकते हैं, जिस प्रकार से निस्यंदन प्रक्रिया में छिद्रों से ठोस कणों को द्रव से अलग किया जाता है।
प्रश्न- 8. कोविड़-19 (कोरोना वायरस महामारी) के समय, हम सभी ने मास्क पहने थे। सामान्यतया वे किस सामग्री से बने होते हैं? आपके मुंह और नथुनों (नाक) को ढंकने में मास्क की क्या भूमिका है?
उत्तर- कोविड़-19 के समय जिन मास्क को हम सभी पहनते थे वे सामान्यतः कपास या पाॅलिएस्टर से बने होते थे। मास्क की भूमिका यह होती है कि वह हवा में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया तथा धूल और अन्य हानिकारक कणों को नाक और मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने से रोकता है। यह मास्क निस्यंदन प्रक्रिया की तरह काम करता है और बाहरी हानिकारक तत्वों को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है।
प्रश्न- 9. आपको आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे का मिश्रण दिया गया है। इस मिश्रण के प्रत्येक अवयव को पृथक करने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार कीजिए।
उत्तर- पहला चरण- हस्त चयन: सबसे पहले मिश्रण से आलू को हस्त चयन की विधि का उपयोग करके अलग कर लें। आलू का बड़ा आकार उसे आसानी से चयन करने में मदद करता है।
दूसरा चरण- निस्तारण: चयन के बाद बचे हुए आलू को पानी में डाल दें। लकड़ी का बुरादा हल्का होता है और वह पानी की सतह पर तैर जाएगा, जबकि नमक पानी में घुल जाएगा। लकड़ी के बुरादे को पानी की सतह से अलग करें।
तीसरा चरण- वाष्पीकरण: निस्तारण विधि का प्रयोग करने बाद नमक घुले हुए पानी को वाष्पीकरण विधि का प्रयोग कर नमक अलग कर लेंगे। पानी को उबालकर वाष्पित कर दें जिससे नमक बर्तन के तल में बच जाएगा। इस प्रकार, आप नमक को भी अलग कर सकते हैं।
प्रश्न- 10. अग्रलिखित 'बुध्दिमान लीला' शीर्षक कहानी पढ़ें। इसमें यत्र-तत्र आए दो वैकल्पिक शब्दों में से सबसे उचित विकल्प पर सही (✓) का निशान लगाएं। अपनी पसंद से अनुच्छेद का कोई अन्य उपयुक्त शीर्षक दें।
लीला अपने पिता के साथ खेत में काम कर रही थीं। जब उसे ध्यान आया कि वे पीने का पानी घर पर ही छोड़ आए हैं। इससे पहले कि उसके पिता को प्यास/भूख लगें, वह पास के तालाब से पानी/अनाज लेने गई। डिब्बे में पानी लेने के बाद उसने ध्यान दिया कि पानी मटमैला है और पीने के लिए योग्य/अयोग्य है। पानी शुद्ध करने के लिए, उसने पानी को कुछ समय के लिए रख दिया और उसके बाद मटमैले पानी को कागज/मलमल के कपड़े से निस्यंदित किया/मथा। तब लीला ने पानी को दस मिनट तक ढके बर्तन में ठंडा किया/उबाला। ठंडे/ उबले पानी को उसने दोबारा से निस्यंदित किया। मथा और उसने पानी पीने योग्य/अयोग्य बनाया। यह पानी उसने अपने पिताजी को दिया। उन्होंने लीला को आर्शीवाद दिया और उसके इस प्रयास की सराहना की।
उत्तर- लीला अपने पिता के साथ खेत में काम कर रही थी। जब उसे ध्यान आया कि वे पीने का पानी घर पर ही छोड़ आए हैं। इससे पहले कि उसके पिता को प्यास (✓) लगे, वह पास के तालाब से पानी (✓) लेने गई। डिब्बे में पानी लेने के बाद उसने ध्यान दिया कि पानी मटमैला है और पीने के लिए अयोग्य (✓) हैं। पानी को शुद्ध करने के लिए उसने पानी को कुछ समय के लिए रख दिया और उसके बाद मटमैले पानी को मलमल (✓) के कपड़े में निस्यंदित (✓) किया। तब लीला ने पानी को दस मिनट तक ढके बर्तन में उबाला (✓)। उबले (✓) पानी को उसने दोबारा से निस्यंदित (✓) किया और उसने पानी पीने योग्य (✓) बनाया। यह पानी उसने अपने पिताजी को दिया। उन्होंने लीला को आर्शीवाद दिया और उसके इस प्रयास की सराहना की।
अन्य उपयुक्त शीर्षक: "समझदार लीला"


