CHAPTER- 3 पदार्थों का पृथक्करण
Notes
1. पृथक्करण- पदार्थों के मिश्रण को अलग-अलग करना पृथक्करण कहलाता है।
2. पृथक्करण की विधियां- 1. हस्त चयन, 2. थ्रेशिंग, 3. निष्पावन, 4. चालन, 5. अवसादन, निस्तारण तथा निस्यंदन, 6. वाष्पन।
3. हस्त चयन- हस्त चयन की विधि का उपयोग गेहूं, चावल तथा दालों से कुछ बड़े मिट्टी के कणों, पत्थर तथा भूसे को पृथक करने में किया जा सकता है। ऐसी अशुद्धियों की मात्रा प्रायः बहुत अधिक नहीं होती।
4. थ्रेशिंग- सूखे पौधों की डंडियों से अन्नकणों अथवा अनाज को पृथक करने के प्रक्रम को थ्रेशिंग कहते हैं। इस प्रक्रम में डंडियों को पीटकर अन्नकणों को पृथक किया जाता है।
- कभी-कभी थ्रेशिंग का कार्य बैलों की सहायता से किया जाता है।
5. निष्पावन- किसी मिश्रण के अवयवों को इस प्रकार पृथक करने की विधि निष्पावन कहलाती है।
- निष्पावन का उपयोग पवनों अथवा वायु के झोंकों द्वारा मिश्रण से भारी तथा हल्के अवयवों को पृथक करने में किया जाता है।
6. चालन- चालन विधि का उपयोग मिश्रण के दो ऐसे अवयवों, जिनकी आमापों में अंतर हो, को पृथक करने में किया जाता है।
7. अवसादन, निस्तारण तथा निस्यंदन-
- मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रक्रम को अवसादन कहते हैं।
- अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए जल को मिट्टी सहित उड़ेलने की क्रिया को निस्तारण कहते हैं।
- निस्यंदन (फिल्टर करना) विधि का उपयोग चाय से चाय की पत्तियां छानने, निस्यंदन विधि का उपयोग घरों पर पनीर बनाने में भी किया जाता है।
- पनीर बनाने के लिए दूध को उबालने से पहले उसमें नींबू का रस मिलाया जाता है। इससे पनीर के ठोस कणों तथा द्रव का मिश्रण प्राप्त होता है। पनीर को इस मिश्रण से कपड़े या छन्नी से फिल्टर करके पृथक किया जाता है।
8. वाष्पन- जल को उसके वाष्प में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं। जहां पर जल होता है वाष्पन की प्रक्रिया निरंतर होती रहती है।
9. संतृप्त विलयन- जिस विलयन में कोई पदार्थ और अधिक न घुल सके वह उस पदार्थ का संतृप्त विलयन होता है।
अभ्यास
प्रश्न- 1. हमें किसी मिश्रण के विभिन्न अवयवों को पृथक करने की आवश्यकता क्यों होती हैं? दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर- किसी पदार्थ का उपयोग करने से पहले हमें उसमें मिश्रित हानिकारक तथा अनुपयोगी पदार्थों को पृथक करने की आवश्यकता होती है। उदाहरण- हम खाना पकाने से पहले खाद्य पदार्थ को धो-कर उसमें से अशुद्धियां अलग कर देते हैं। जैसे- चावल पकाने से पहले उन्हें धोया जाता है।
प्रश्न- 2. निष्पावन से क्या अभिप्राय है? यह कहां उपयोग किया जाता?
उत्तर- किसी मिश्रण से भारी तथा हल्के अवयवों को पवन तथा वायु के झोंकों द्वारा पृथक करने के लिए निष्पावन विधि का उपयोग किया जाता है। इस विधि का उपयोग साधारणतया किसान द्वारा हल्के भूसे को भारी अन्नकणों से पृथक करने के लिए करते हैं।
प्रश्न- 3. पकाने से पहले दालों के किसी नमूने से आप भूसे एवं धूल के कण कैसे पृथक करेंगे?
उत्तर- पकाने से पहले दालों के किसी नमूने से भूसे एवं धूल के कण को पृथक करने के लिए हस्त चयन विधि का उपयोग करेंगे।
प्रश्न- 4. छालन से क्या अभिप्राय है? यह कहां उपयोग होता हैं?
उत्तर- छालन का प्रयोग सामान्य आकारों वाले अवयवों को पृथक करने के लिए किया जाता है, इस विधि द्वारा छालन सामान्य आकारों वाले अवयवों को छेद से होकर गुजरने देती है जबकि बड़ी अशुद्धियां छलनी में ही रहती है।
इस विधि का उपयोग आटे से अनाज के छोटे-छोटे कणों को पृथक करने में किया जाता है।
प्रश्न- 5. रेत और जल के मिश्रण से आप रेत तथा जल को कैसे पृथक करेंगे?
उत्तर- रेत और जल के मिश्रण को पृथक करने के लिए निम्न कार्य करेंगे-
- एक बीकर में दोनों के मिश्रण को रखकर छोड़ दें।
- कुछ समय बाद रेत बीकर के तल पर जम जाएगी।
- पानी को धीरे-धीरे एक बीकर से दूसरे बीकर में डालें।
- हम रेत के बारीक कणों को हटाने के लिए फिल्टर पेपर का उपयोग भी कर सकते हैं।
प्रश्न- 6. आटे और चीनी के मिश्रण से क्या चीनी को पृथक करना संभव है? अगर हां, तो आप इसे कैसे करेंगे?
उत्तर- हां, किसी छलनी के प्रयोग से चालन विधि द्वारा आटे और चीनी के मिश्रण को अलग किया जा सकता है।
प्रश्न- 7. पंकिल जल के किसी नमूने से आप स्वच्छ जल कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर- पंकिल जल से स्वच्छ जल प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित कार्य करेंगे-
- एक बीकर में पंकिल जल डालकर कुछ समय के लिए छोड़ दें।
- कुछ समय बाद बीकर के नीचे अशुद्धियां जमा हो जाएगी।
- ऊपरी परत साफ पानी की है, तथा इसे दूसरे बीकर में डाल दें।
- महीन अशुद्धियों को दूर करने के लिए इसे फिल्टर पेपर की मदद से फिर से छान लेते हैं।
प्रश्न- 8. रिक्त स्थानों को भरिए:
(क) धान के दानों को डंडियों से पृथक करने की विधि को _________ कहते हैं।
(ख) किसी एक कपड़े पर दूध को उड़ेलते है तो मलाई उस पर रह जाती है। पृथक्करण की यह प्रक्रिया _______ कहलाती है।
(ग) समुद्र के जल से नमक _______ प्रक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है।
(घ) जब पंकिल जल को पूरी रात एक बाल्टी में रखा जाता है तो अशुद्धियां तली में बैठ जाती है। इसके पश्चात स्वच्छ जल को ऊपर से पृथक कर लेते हैं। इसमें उपयोग होने वाली पृथक्करण की प्रक्रिया को _________ कहते हैं।
उत्तर- (क) धान के दानों को डंडियों से पृथक करने की विधि को थ्रेशिंग कहते हैं।
(ख) किसी एक कपड़े पर दूध को उड़ेलते है तो मलाई उस पर रह जाती है। पृथक्करण की यह प्रक्रिया निस्यंदन कहलाती है।
(ग) समुद्र के जल से नमक वाष्पन प्रक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है।
(घ) जब पंकिल जल को पूरी रात एक बाल्टी में रखा जाता है तो अशुद्धियां तली में बैठ जाती है। इसके पश्चात स्वच्छ जल को ऊपर से पृथक कर लेते हैं। इसमें उपयोग होने वाली पृथक्करण की प्रक्रिया को निस्तारण कहते हैं।
प्रश्न- 9. सत्य अथवा असत्य?
(क) दूध और जल के मिश्रण को निस्यंदन द्वारा पृथक किया जा सकता है।
(ख) नमक तथा चीनी के मिश्रण को निष्पावन द्वारा पृथक कर सकते हैं।
(ग) चाय की पत्तियों को चाय से पृथक्करण निस्यंदन द्वारा किया जा सकता है।
(घ) अनाज और भूसे का पृथक्करण निस्तारण प्रक्रम द्वारा किया जा सकता है।
उत्तर- (क) असत्य, (ख) असत्य, (ग) सत्य, (घ)असत्य।
प्रश्न- 10. जल में चीनी तथा नींबू का रस मिलाकर शिकंजी बनाई जाती है। आप बर्फ डालकर इसे ठंडा करना चाहते हैं, इसके लिए शिकंजी में बर्फ चीनी घोलने से पहले डालेंगे या बाद में? किस प्रकरण में अधिक चीनी घोलना संभव होगा?
उत्तर- हमें बर्फ डालने से पहले चीनी घोलना चाहिए।
ठंडे पानी के तुलना में चीनी गर्म पानी में जल्दी घुलती है। हम पानी में बर्फ मिलाने से पहले अधिक चीनी घोल सकते हैं।
