CHAPTER- 5 शरीर में गति
Notes
1. हमारे शरीर में स्वत: ही अनेक गतियां निरंतर होती रहती हैं।
2. हम शरीर के विभिन्न भागों को उसी स्थान से मोड़ अथवा घुमा पाते हैं, जहां पर दो हिस्से एक-दूसरे से जुड़े हो, उदाहरण के लिए कोहनी कंधा अथवा गर्दन, इन स्थानों को संधि कहते हैं।
- विभिन्न गतिविधियों एवं विभिन्न प्रकार की गतियों के लिए हमारे शरीर में अनेक प्रकार की संधियां होती हैं।
3. सिर, चेहरे, नाक, गर्दन, कान, कंधे के पीछे, हाथ, पैर पर स्पर्श करने पर कठोर संरचनाएं महसूस होती है, ये संरचना अस्थियां है।
4. एक अस्थि का गेंद वाला गोल हिस्सा दूसरी अस्थि की कटोरी रूपी गुहिका में धंसा हुआ है। इस प्रकार की संधि सभी दिशाओं में गति प्रदान करती है।
5. धुराग्र संधि- गर्दन तला सिर को जोड़ने वाली संधि, धुराग्र संधि है।
- इसके द्वारा सिर को आगे-पीछे या दाएं एवं बाएं घुमा सकते हैं।
- धुराग्र संधि में बेलनाकार अस्थि एक छल्ले में घूमती हैं।
6. कोहनी मे हिंज (कब्जा) संधि होती है, जिससे केवल आगे और पीछे एक ही दिशा में गति हो सकती हैं।
7. हमारे सिर की अस्थियों के बीच की कुछ संधियां उन संधियों से भिन्न है जिनकी चर्चा अब तक की है। ये अस्थियां इन संधियों पर हिल नहीं सकती ऐसी संधियों को अचल संधि कहते हैं।
8. कंकाल- हमारे शरीर की सभी अस्थियां ठीक इसी प्रकार शरीर को एक सुंदर आकृति प्रदान करने के लिए एक ढांचे का निर्माण करती है। इस ढांचे को कंकाल कहते हैं।
9. एक्स-रे- एक्स-रे चित्र से हमें शरीर की अस्थियों की आकृति का पता चलता है।
- कई बार चोट लगने पर चिकित्सक एक्स-रे करवाते हैं, जिससे उन्हें अस्थियों को हुई संभावित क्षति के विषय में जानकारी प्राप्त होती है।
10. कारपेल- हमारे हाथ की अंगुलियां अनेक छोटी-छोटी अस्थियों से बनी है जिन्हें कारपेल कहते हैं।
11. हमारे पसलियां विशेष रूप से मुड़ी हुई होती है। वे वक्ष की अस्थि एवं मेरुदंड से जुड़कर एक बक्से की रचना करती है। इस शंकुरूपी बक्से को पसली-पिंजर कहते हैं।
- वक्ष के दोनों तरफ 12 पसलियां होती हैं। हमारे शरीर के कुछ महत्वपूर्ण अंग इसमें सुरक्षित रहते हैं।
12. हमारे शरीर में गर्दन से प्रारंभ होकर पीठ पर नीचे तक एक संरचना महसूस होती है उसे मेरुदंड कहते हैं। यह अनेक छोटी-छोटी अस्थियों से बना है, जिसे कशेरुका कहते हैं।
- मेरुदंड 33 कशेरुकाओं का बना होता है। पसली पिंजर भी वक्ष क्षेत्र की इन अस्थियों से जुड़ा है।
13. मनुष्य के कंधों के समीप दो उभरी हुई अस्थियां दिखाई देती है, इन्हें कंधे की अस्थियां कहते हैं।
14. खोपड़ी- खोपड़ी अनेक अस्थियों के एक-दूसरे से जुड़ने से बनी हैं यह हमारे शरीर के अति महत्वपूर्ण अंग, मस्तिष्क को प्रतिबद्ध करके उसकी सुरक्षा करती है।
15. उपास्थि- कंकाल के कुछ अतिरिक्त अंग भी है जो हड्डियों जितने कठोर नहीं होते हैं और जिन्हें मोड़ा जा सकता है, उन्हें उपास्थि कहते हैं।
16. पेशी- यह शरीर में संकुचन, जो अंगों में गति, संचलन और शारीरिक स्थिरता के लिए जिम्मेदार होता है।
- चलते अथवा भागते समय आप अपने पैरों की पेशियों में भी इसी प्रकार का संकुचन देख सकते हैं।
- संकुचन की अवस्था में पेशी छोटी, कठोर एवं मोटी हो जाती है। यह अस्थि को खींचती है।
17. किसी अस्थि को गति प्रदान करने के लिए दो पेशियों को संयुक्त रूप से कार्य करना होता है। जब दो पेशियों में से कोई एक सिकुड़ती है तो अस्थि उस दिशा में खींच जाती है। युगल की दूसरी पेशी शिथिल (लंबाई में बढ़कर पतली हो जाती है।) अवस्था में आ जाती है।
- पेशी केवल खींच सकती है, वह धक्का नहीं दे सकती। अतः एक अस्थि को गति देने के लिए दो पेशियों को संयुक्त रूप से कार्य करना होता है।
18. जंतुओं की चाल-
A) केंचुआ- केंचुए के शरीर में अस्थियां नहीं होती परंतु इसमें पेशियां होती हैं।
- चलने के दौरान, केंचुआ अपने शरीर के पश्च भाग को भूमि में जकड़े रहता है तथा अग्र भाग को फैलाता है।
- इसके बाद वह अग्र भाग से भूमि को पकड़ता है तथा पश्च भाग को स्वतंत्र कर देता है। इसके पश्चात् यह शरीर को संकुचित करता है तथा पश्च भाग को आगे की ओर खींचता है। इससे वह कुछ दूरी तक आगे बढ़ता है।
- इसके शरीर में छोटे-छोटे अनेक शूक (बाल जैसे आकृति) होते हैं। ये शूक पेशियों से जुड़े होते हैं। ये शूक मिट्टी में उसकी पकड़ को मजबूत बनाते हैं।
B) घोंघा- घोंघे की पीठ पर गोल संरचना होती है, इसे कवच कहते हैं और यह घोंघे का बाह्य-कंकाल है।
- यह कवच एकल एकक होता है और यह घोंघे को चलने में कोई सहायता नहीं करता।
C) तिलचट्टा- यह जमीन पर चलता है, दीवार पर चढ़ता है और वायु में उड़ता भी है। इनमें तीन जोड़ी पैर होते हैं जो चलने में सहायता करते हैं।
- इसका शरीर कठोर बाह्य-कंकाल द्वारा ढका होता है। यह बाह्य-कंकाल विभिन्न एककों की परस्पर संधियों द्वारा बनता है जिसके कारण गति संभव हो पाती है।
- वक्ष से दो जोड़े पंख भी जुड़े होते हैं।
- तिलचट्टे में विशिष्ट पेशियां होती है। पैर की पेशियां उन्हें चलने में सहायता करती है। वक्ष की पेशियां तिलचट्टे के उड़ने के समय उसके परों को गति देती है।
D) पक्षी- पक्षी इसीलिए उड़ पाते हैं क्योंकि उनका शरीर उड़ने के लिए अनुकूलित होता है।
- उनकी अस्थियों में वायु प्रकोष्ठ होते हैं जिनके कारण उनकी अस्थियां हल्की परंतु मजबूत होती है।
- अग्र पाद की अस्थियां रूपांतरित होकर पक्षी के पंख बनाती है।
- वक्ष की अस्थियां उड़ने वाली पेशियों को जकड़े रखने के लिए विशेष रूप से रूपांतरित होती है तथा पंखों को ऊपर-नीचे करने में सहायक होती है।
E) मछली- मछली का सिर एवं पूंछ उसके मध्य भाग की अपेक्षा पतला एवं नुकीला होता है। शरीर की ऐसी आकृति धारा रेखीय कहलाती है।
- इसकी विशेष आकृति के कारण जल इधर-उधर बहकर निकल जाता है और मछली जल में सरलता से तैर सकती है।
F) सर्प- सर्प का मेरुदंड लंबा होता है। शरीर की पेशियां क्षीण एवं असंख्य होती है।
- पेशियां मेरुदंड, पसलियों एवं त्वचा को भी एक-दूसरे से जोड़ती है।
- सर्प का शरीर अनेक वलय में मुड़ा होता है। इसी प्रकार सर्प का प्रत्येक वलय उसे आगे की ओर धकेलता है।
- इसका शरीर अनेक वलय बनाता है और प्रत्येक वलय आगे को धक्का देता है, इस कारण सर्प बहुत तेज गति से आगे की ओर चलता है परंतु सरल रेखा में नहीं चलता।
अभ्यास
प्रश्न- 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:
(क) अस्थियों की संधियां शरीर को ________ में सहायता करती है।
(ख) अस्थियां एवं उपास्थि संयुक्त रूप से शरीर का _______ बनाते हैं।
(ग) कोहनी की अस्थियां _______ संधि द्वारा जुड़ी होती है।
(घ) गति करते समय _______ के संकुचन से अस्थियां खिंचती है।
उत्तर- (क) अस्थियों की संधियां शरीर को गति मे सहायता करती है।
(ख) अस्थियां एवं उपास्थि संयुक्त रूप से शरीर का कंकाल बनाते हैं।
(ग) कोहनी की अस्थियां हिंज संधि द्वारा जुड़ी होती हैं।
(घ) गति करते समय मांसपेशी के संकुचन से अस्थियां खिंचती है।
प्रश्न- 2. निम्न कथनों के आगे सत्य (T) तथा असत्य (F) को इंगित कीजिए।
(क) सभी जंतुओं की गति एवं चलन बिलकुल एक समान होता है। ( )
(ख) उपास्थि अस्थि की अपेक्षा कठोर होती हैं। ( )
(ग) अंगुलियों की अस्थियों में संधि नहीं होती। ( )
(घ) अग्रभुजा में दो अस्थियां होती है। ( )
(ड़) तिलचट्टों में बाह्य-कंकाल पाया जाता है। ( )
उत्तर- (क)- असत्य, (ख)- असत्य, (ग)- असत्य, (घ)- सत्य, (ड़)- सत्य।
प्रश्न- 3. काॅलम 1 में दिए गए शब्दों का संबंध काॅलम 2 के एक अथवा अधिक कथन से जोड़िए:
उत्तर- प्रश्न- 4. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(क) कंदुक-खल्लिका संधि क्या है?
(ख) कपाल की कौन-सी अस्थि गति करती हैं?
(ग) हमारी कोहनी पीछे की ओर क्यों नहीं मुड़ सकती?
उत्तर- (क) कंदुक-खल्लिका संधि ऐसी संधि है जो जुड़े हुए भाग को सभी दिशाओं में घुमाने की अनुमति देता है। उदाहरण- कंधे का जोड़
(ख) कपाल मे निचला जबड़ा गति करता है।
(ग) कोहनी हिंज संधि का उदाहरण है जो केवल एक ही दिशा में गति करने की अनुमति देता है। इसलिए, हम अपनी कोहनी को पीछे की ओर नहीं ले जा सकते हैं।


