CLASS- 6 SCIENCE

 

CHAPTER- 9 विद्युत् तथा परिपथ 

Notes 

1. विद्युत् का प्रयोग हम अपने बहुत से कार्यों को आसान बनाने के लिए करते हैं। विद्युत् हमें बिजली घर से प्राप्त होती है। 

2. विद्युत् सेल- विद्युत्-सेल में धातु की टोपी धनात्मक सिरा (+) तथा धातु की डिस्क ऋणात्मक सिरा (-) कहलाता है। 

  • सभी विद्युत्-सेलों में दो सिरे होते हैं, जिनमें एक धनात्मक सिरा तथा दूसरा ऋणात्मक सिरा होता है। 
  • जब विद्युत्-सेल में संचित रासायनिक-पदार्थ इस्तेमाल कर लिए जाते हैं तब विद्युत्-सेल, विद्युत् पैदा करना बंद कर देता है। 
3. तंतु- बल्ब के अंदर प्रकाश उत्सर्जित करने वाले पतले तार को बल्ब का तंतु कहते है। 
  • ये तंतु दो मोटे तारो के बीच लगा होता है। 
4. विद्युत् परिपथ- विद्युत् परिपथ, विद्युत्-सेल के दो टर्मिनलों के बीच विद्युत्-प्रवाह के संपूर्ण पथ को दर्शाता है। 

5. बल्ब केवल तभी दीप्त होता है जब परिपथ में विद्युत्-धारा प्रवाहित होती है। 

6. कभी-कभी विद्युत्-बल्ब, विद्युत्-सेल से जुड़े होने पर भी दीप्त नहीं होता। ऐसा बल्ब के फ्यूज होने के कारण हो सकता हैं। 
  • बल्ब फ्यूज होने का कारण, बल्ब के तंतु का खंडित होना। 
7. विद्युत्-स्विच- स्विच एक सरल युक्ति है जो परिपथ को जोड़ या तोड़ सकती है। 
  • घरों में स्विच का उपयोग बल्ब को दीप्तिमान करने तथा अन्य युक्तियों को चलाने के लिए करते हैं। 
8. विद्युत्-चालक- जो पदार्थ विद्युत्-धारा का प्रवाह अपने अंदर से होने देते हैं वे विद्युत्-चालक है। 

9. विद्युत्-रोधक- ये अपने अंदर से विद्युत्-धारा को प्रवाहित नहीं होने देते। 

10. हमारा शरीर विद्युत् का बहुत अच्छा चालक है। अतः विद्युत् उपकरणों का उपयोग करते समय हमें हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। 

अभ्यास 


प्रश्न- 1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: 
(क) एक युक्ति जो परिपथ को तोड़ने के लिए उपयोग की जाती है _________ कहलाती है। 
(ख) एक विद्युत्-सेल में ________ टर्मिनल होते हैं। 
उत्तर- (क) एक युक्ति जो परिपथ को तोड़ने के लिए उपयोग की जाती है स्विच कहलाती है। 
(ख) एक विद्युत-सेल में दो टर्मिनल होते हैं। 

प्रश्न- 2. निम्नलिखित कथनों पर 'सही' या 'गलत' का चिन्ह लगाइए। 
(क) विद्युत्-धारा धातुओं से होकर प्रवाहित हो सकती हैं। 
(ख) विद्युत्-परिपथ बनाने के लिए धातु के तारो के स्थान पर जूट की डोरी प्रयुक्त की जा सकती हैं। 
(ग) विद्युत्-धारा थर्मोकोल की शीट से होकर प्रवाहित हो सकती है। 
उत्तर- (क)- सही, (ख)- गलत, (ग)- गलत। 

प्रश्न- 3. व्याख्या कीजिए कि चित्र 9.13 में दर्शाई गई व्यवस्था में बल्ब क्यों नहीं दीप्तिमान होता है? 

उत्तर- चित्र में बल्ब इसलिए दीप्तिमान नहीं है क्योंकि पेचकस का हत्था अधातु से बना होता है। जो विद्युत् धारा का प्रवाह नहीं होने देता है। 

प्रश्न- 4. चित्र 9.14 में दर्शाए गए आरेख को पूरा कीजिए और बताइए कि बल्ब को दीप्तिमान करने के लिए तारों के स्वतंत्र सिरों को किस प्रकार जोड़ना चाहिए? 

उत्तर- 


प्रश्न- 5. विद्युत्-स्विच को उपयोग करने का क्या प्रयोजन है? कुछ विद्युत्-साधित्रों के नाम बताइए जिनमें स्विच उनके अंदर ही निर्मित होते हैं? 
उत्तर- विद्युत्-स्विच एक सरल उपकरण है जो विद्युत् परिपथ को जोड़ता है या उसे तोड़ देता है। रेडियो, टीवी, बिजली के खिलौने आदि में स्विच उनके अंदर ही निर्मित होते हैं। 

प्रश्न- 6. चित्र 9.14 में सुरक्षा पिन की जगह यदि रबड़ लगा दें तो क्या बल्ब दीप्तिमान होगा? 
उत्तर- यदि हम सुरक्षा पिन की जगह रबड़ लगा देंगे तो विद्युत् परिपथ पूरा नहीं होगा, अतः बल्ब दीप्तिमान नहीं होगा, क्योंकि रबड़ एक विद्युत् रोधक है। 

प्रश्न- 7. क्या चित्र 9.15 में दिखाए गए परिपथ में बल्ब दीप्तिमान होगा? 
उत्तर- नहीं, बल्ब दीप्तिमान नहीं होगा क्योंकि दोनों तार बल्ब के केवल एक टर्मिनल से जुड़े होते हैं जिस कारण विद्युत् धारा बल्ब के माध्यम से प्रवाहित नहीं होगी और वह दीप्तिमान नहीं होगा। 

प्रश्न- 8. किसी वस्तु के साथ "चालक-परीक्षित्र" का उपयोग करके यह देखा गया कि बल्ब दीप्तिमान होता है। क्या इस वस्तु का पदार्थ विद्युत्-चालक है या विद्युत्-रोधक? व्याख्या कीजिए। 
उत्तर- क्योंकि बल्ब दीप्तिमान है जिसका अर्थ है विद्युत्-परिपथ पूरा हो रहा है अतः वस्तु का पदार्थ विद्युत्-चालक हैं। 

प्रश्न- 9. आपके घर में स्विच की मरम्मत करते समय विद्युत्-मिस्तरी रबड़ के दस्ताने क्यों पहनता है? व्याख्या कीजिए। 
उत्तर- विद्युत् मिस्तरी रोजाना बिजली के तारों को छूते हैं जिनमें अक्सर विद्युत् प्रवाहित हो सकती थी। चूंकि मानव शरीर एक अच्छा विद्युत् का चालक है जिससे विद्युत् मिस्तरी को झटका लग सकता है। रबड़ के दस्ताने एक विद्युत् रोधक है। अतः बिजली के झटके से खुद को बचाने के लिए विद्युत्-मिस्तरी मरम्मत करते समय रबड़ के दस्ताने का उपयोग करते हैं। 

प्रश्न- 10. विद्युत्-मिस्तरी द्वारा उपयोग किए जाने वाले औजार, जैसे- पेचकस और प्लायर्स के हत्थों पर प्रायः प्लास्टिक या रबड़ के आवरण चढ़े होते हैं। क्या आप इसका कारण समझा सकते हैं ्? 
उत्तर- प्लास्टिक या रबड़ विद्युत् रोधक होते हैं और विद्युत् प्रवाह के साथ सीधे संपर्क से बचने में मदद करते हैं। विद्युत् रोधक की मदद के बिना प्लायर्स या पेचकस का इस्तेमाल करने वाले को बिजली का झटका लग सकता है। जब विद्युत्-मिस्तरी प्लास्टिक या रबड़ के आवरण से चढ़े हुए पेचकस और प्लायर्स का इस्तेमाल करते हैं तो उनके शरीर से विद्युत् धारा प्रवाहित नहीं होती, जिससे वे किसी भी दुर्घटना से सुरक्षित हो जाते हैं। 

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